एसडी पीजी कॉलेज पानीपत बना कुरुक्षेत्र विश्वविधालय जोनल शतरंज का चैंपियन. जीता गोल्ड मैडल. 

admin  6 hours, 45 minutes ago Top Stories

-दो खिलाड़ी नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी चेस चैंपियनशिप के लिए चयनित 
-शतरंज एक बेहतरीन दिमागी कसरत है जो याददाश्त, एकाग्रता और तार्किक सोच को तेज करती: डॉ अनुपम अरोड़ा

 PANIPAT AAJKAL , 19 फरवरी: एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की महिला चेस टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय जोनल शतरंज चैंपियनशिप में चैंपियन बनकर गोल्ड मैडल पर कब्ज़ा किया । इसके साथ-साथ कॉलेज की दो छात्रा खिलाड़ियों नेहा और मृदुल का नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी चेस चैंपियनशिप के लिए भी चयन हो गया है । कॉलेज की महिला चेस टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय में ओवर आल तीसरा स्थान भी हासिल किया । एसडी पीजी कॉलेज की टीम फाइनल मैच में यूटीडी कि टीम को 4-0 के अंतर से हराया । इससे पहले लीग मैचो में कॉलेज के खिलाड़ियों ने शानदार खेल के बूते पर आर्य कॉलेज पानीपत, राजकीय महाविधालय पानीपत और यूटीडी कुरुक्षेत्र की टीमों के विरुद्ध पॉइंट्स अर्जित कर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया । कप्तान नेहा, मृदुल, निशिता, अंजली और कुहू के जानदार खेल की बदौलत कॉलेज ने इस उपलब्धि को हासिल किया । विजेता छात्राओं का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो नीलम, प्रो पूजा, कोच अंकुश मलिक और प्रो आनंद ने किया ।    

एसडी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि शतरंज खेलने से दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है जिससे बुद्धिमत्ता लेवल में सुधार होता है । खेल के दौरान चालों को याद रखने और एकाग्र रहने से मानसिक सतर्कता बढ़ती है जो हमारी स्मृति को मजबूत करती है । शतरंज खिलाड़ियों को दूरगामी परिणाम सोचने और योजना बनाने में निपुण बनाता है । इसके खिलाड़ी सामने वाले की चालों का विश्लेषण कर, समस्या का हल ढूँढना सीखते हैं । सभी विजेता खिलाड़ियों को आशीर्वाद और भविष्य के लिए शुभकामनायें ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि शतरंज एक बेहतरीन दिमागी कसरत है जो याददाश्त, एकाग्रता और तार्किक सोच को तेज करती है । यह रचनात्मकता, योजना बनाने की क्षमता और धैर्य को बढ़ाता है, साथ ही मानसिक तनाव कम करने और बौद्धिक क्षमता में सुधार करने में मदद करता है । शतरंज खेलने से मस्तिष्क का दायाँ हिस्सा सक्रिय होता है जिससे रचनात्मक सोच विकसित होती है । हार-जीत का सामना करने से खिलाड़ियों में आत्म-नियंत्रण, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास बढ़ता है । चेस तनाव को कम करने और मानसिक व्याकुलता को प्रबंधित करने में मदद करता है । दिमाग को सक्रिय रखने के कारण, यह डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है । बच्चों के लिए, यह खेल गणित और विज्ञान जैसे विषयों में तार्किक क्षमता को बढ़ाकर उनका प्रदर्शन सुधारता है । शतरंज हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है और यह एक मनोरंजक ‘माइंड थेरेपी’ की तरह भी काम करता है । 

सभी खिलाड़ियों ने कहा कि उनकी जीत का श्रेय उनके माता-पिता, एसडी कॉलेज प्रबंधकारिणी, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रो सुशीला बेनीवाल और कोच अंकुश मलिक को जाता है । उनके माता-पिता सदा उनके साथ खड़े है और कॉलेज से भी उन्हे भरपूर मदद और हौंसला मिला है । वे अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ना चाहते है और इसके लिए वे निरंतर अभ्यास में जुटे हुए है ।

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